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The glory and importance of Mother Baglamukhi

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माता बगलामुखी के बारे में

माता बगलामुखी को दस महाविद्याओं में एक प्रमुख देवी माना जाता है। उनकी उपासना विशेष रूप से तंत्र साधना में की जाती है। माता बगलामुखी को स्तंभन की देवी कहा जाता है, जो शत्रुओं और विरोधियों को रोकने और उनकी गतिविधियों को स्थिर करने में सक्षम होती हैं। उनकी महिमा और महत्व के विषय में विस्तार से जानना हमारे जीवन को नई दिशा दे सकता है। यहां माता बगलामुखी की महिमा और महत्व का विस्तृत वर्णन प्रस्तुत है।

माता बगलामुखी की उत्पत्ति

माता बगलामुखी का जन्म एक विशेष परिस्थिति में हुआ था। यह कहा जाता है कि एक बार त्रेतायुग में जब पूरी सृष्टि को संकट का सामना करना पड़ा और एक भयंकर तूफान ने समस्त ब्रह्मांड को विनाश की कगार पर ला दिया, तब सभी देवताओं ने भगवान विष्णु से सहायता की प्रार्थना की। भगवान विष्णु ने तपस्या की और सरोवर में स्नान किया। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर माता बगलामुखी प्रकट हुईं और उन्होंने अपनी शक्ति से उस भयंकर तूफान को शांत किया। इसी कारण से माता बगलामुखी को स्तंभन शक्ति की देवी माना जाता है।

माता बगलामुखी का स्वरूप

माता बगलामुखी का स्वरूप अत्यंत दिव्य और अद्वितीय है। वे पीले वस्त्र धारण करती हैं और उनके चार हाथ होते हैं। उनके एक हाथ में गदा, दूसरे में शत्रु की जीभ, तीसरे में अभय मुद्रा और चौथे में वर मुद्रा होती है। उनकी इस मुद्रा से स्पष्ट होता है कि वे शत्रुओं का नाश करने और अपने भक्तों को अभय और वरदान देने वाली देवी हैं।

माता बगलामुखी की पूजा विधि

माता बगलामुखी की पूजा तंत्र साधना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। उनकी पूजा विशेष विधि और मंत्रों के साथ की जाती है। यहां माता बगलामुखी की पूजा विधि का संक्षिप्त विवरण दिया गया है:

  1. स्नान और शुद्धिकरण: सबसे पहले स्नान करें और शुद्ध वस्त्र धारण करें।
  2. पूजा स्थल की शुद्धि: पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें और पीले कपड़े बिछाएं।
  3. माता बगलामुखी की प्रतिमा या चित्र: माता बगलामुखी की प्रतिमा या चित्र को पूजा स्थल पर स्थापित करें।
  4. दीप जलाएं: दीपक जलाएं और धूप, अगरबत्ती का प्रज्वलन करें।
  5. आसन और ध्यान: पीले आसन पर बैठें और कुछ समय के लिए ध्यान करें।
  6. मंत्र जाप: माता बगलामुखी के बीज मंत्र “ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिव्हां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा” का जाप करें।
  7. प्रसाद: माता बगलामुखी को बेसन के लड्डू, पान, सुपारी आदि का भोग लगाएं।
  8. आरती: माता बगलामुखी की आरती करें और अंत में प्रसाद वितरण करें।

माता बगलामुखी के मंत्र

माता बगलामुखी के मंत्र अत्यंत शक्तिशाली माने जाते हैं। इन मंत्रों का जाप करने से शत्रुओं का नाश, मुकदमों में विजय, और सभी प्रकार की बाधाओं का निवारण होता है। माता बगलामुखी के कुछ प्रमुख मंत्र निम्नलिखित हैं:

  1. बीज मंत्र: ” ह्ल्रीं ” या “ह्लीं” “HLREEM or HLEEM”
  2. मंत्र: “ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिव्हां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा।”

माता बगलामुखी की महिमा

माता बगलामुखी की महिमा असीमित है। वे अपने भक्तों की सभी बाधाओं को दूर करती हैं और उन्हें सुरक्षा प्रदान करती हैं। माता बगलामुखी की उपासना करने से जीवन में अद्भुत सकारात्मक परिवर्तन आते हैं। उनकी महिमा के कुछ प्रमुख पहलू निम्नलिखित हैं:

  1. शत्रुओं का नाश: माता बगलामुखी की उपासना से शत्रुओं का नाश होता है और वे स्थिर हो जाते हैं।
  2. मुकदमों में विजय: जो लोग न्यायालय के मामलों में फंसे होते हैं, उनके लिए माता बगलामुखी की उपासना अत्यंत लाभकारी होती है।
  3. वाणी पर नियंत्रण: माता बगलामुखी की कृपा से वाणी पर नियंत्रण होता है और व्यक्ति अपनी बात को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर सकता है।
  4. सुरक्षा और रक्षा: माता बगलामुखी अपने भक्तों की हर प्रकार की सुरक्षा करती हैं और उन्हें हर विपत्ति से बचाती हैं।
  5. ध्यान और साधना में सफलता: माता बगलामुखी की उपासना से ध्यान और साधना में सफलता मिलती है और व्यक्ति आत्मिक उन्नति प्राप्त करता है।

माता बगलामुखी का महत्व

माता बगलामुखी का महत्व उनकी अद्वितीय शक्तियों और भक्तों के प्रति उनकी करुणा में निहित है। वे न केवल शत्रुओं का नाश करती हैं बल्कि अपने भक्तों को आंतरिक शक्ति और साहस भी प्रदान करती हैं। माता बगलामुखी का महत्व निम्नलिखित बिंदुओं में स्पष्ट होता है:

  1. विपत्तियों से रक्षा: माता बगलामुखी विपत्तियों से रक्षा करती हैं और कठिन परिस्थितियों में साहस प्रदान करती हैं।
  2. शत्रुओं का विनाश: उनकी उपासना से शत्रुओं का विनाश होता है और वे स्थिर हो जाते हैं।
  3. आध्यात्मिक उन्नति: माता बगलामुखी की उपासना से व्यक्ति आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त करता है और आत्मा की शुद्धि होती है।
  4. ध्यान और साधना: उनकी उपासना से ध्यान और साधना में गहरी एकाग्रता प्राप्त होती है।
  5. न्याय और सत्य की जीत: माता बगलामुखी न्याय और सत्य की देवी हैं। उनकी उपासना से व्यक्ति को न्याय और सत्य की प्राप्ति होती है।

अंत में

माता बगलामुखी की महिमा और महत्व असीमित है। उनकी उपासना से शत्रुओं का नाश, न्याय की प्राप्ति, वाणी पर नियंत्रण, और आत्मिक उन्नति होती है। माता बगलामुखी की कृपा से जीवन में आने वाली सभी बाधाओं का निवारण होता है और व्यक्ति को हर प्रकार की विपत्तियों से सुरक्षा मिलती है। माता बगलामुखी की पूजा विधि, मंत्र जाप, और ध्यान से हम अपनी समस्याओं का समाधान प्राप्त कर सकते हैं और जीवन में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। उनकी महिमा और महत्व को समझकर और उनकी उपासना करके हम अपने जीवन को सफल और सुखमय बना सकते हैं।

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बगलामुखी बीज मंत्र: लाभ और मुहुर्थ

दस महाविद्या मे से एक महाविद्या बगलामुखी माता, जिन्हें समस्त ब्रह्मांड की शक्ति का स्रोत माना जाता है। बगलामुखी देवी को संहार और रोकथाम की शक्ति के रूप में पूजा जाता है। बगलामुखी बीज मंत्र का जाप अत्यधिक शक्तिशाली माना जाता है और इससे कई लाभ प्राप्त होते हैं। यहा हम बगलामुखी बीज मंत्र, उसके प्रमुख लाभ और इस मंत्र के जाप के लिए उपयुक्त दिनों के बारे में जानकारी प्रदान करेंगे।

बगलामुखी बीज मंत्र

बगलामुखी बीज मंत्र अत्यंत सरल और शक्तिशाली है। यह मंत्र निम्नलिखित है:

॥ ह्लीं ॥ “HLREEM”

इस मंत्र में ‘ह्लीं’ बीज मंत्र है, जिसे देवी बगलामुखी की शक्ति और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। इस मंत्र का नियमित जाप करने से व्यक्ति को विभिन्न आध्यात्मिक और सांसारिक लाभ प्राप्त होते हैं।

बगलामुखी बीज मंत्र के लाभ

  1. दुश्मनों से सुरक्षा: बगलामुखी बीज मंत्र का जाप करने से शत्रुओं से रक्षा होती है और उन्हें परास्त करने की शक्ति मिलती है।
  2. विवादों में विजय: कानूनी और व्यक्तिगत विवादों में सफलता प्राप्त होती है।
  3. मन की शांति: इस मंत्र का जाप मन को शांति और स्थिरता प्रदान करता है।
  4. नेगेटिव एनर्जी से सुरक्षा: नकारात्मक ऊर्जा और बुरी नजर से रक्षा होती है।
  5. आत्मविश्वास में वृद्धि: आत्मविश्वास और आत्मबल में वृद्धि होती है।
  6. धन और समृद्धि: आर्थिक स्थिति में सुधार होता है और धन की प्राप्ति होती है।
  7. सफलता और उन्नति: करियर और व्यवसाय में सफलता प्राप्त होती है।
  8. परिवारिक समृद्धि: परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का वातावरण बनता है।
  9. स्वास्थ्य में सुधार: शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।
  10. तंत्र और मंत्र की सिद्धि: तंत्र-मंत्र के कार्यों में सिद्धि प्राप्त होती है।
  11. दुष्ट आत्माओं से सुरक्षा: बुरी आत्माओं और अदृश्य बाधाओं से रक्षा होती है।
  12. संकटों का निवारण: जीवन में आने वाले संकटों का निवारण होता है।
  13. शांति और धैर्य: मन में शांति और धैर्य का विकास होता है।
  14. प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता: शैक्षणिक और प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता मिलती है।
  15. वाणी की शक्ति: वाणी में प्रभाव और आकर्षण बढ़ता है।
  16. आध्यात्मिक उन्नति: आत्मिक उन्नति और ज्ञान की प्राप्ति होती है।
  17. कुंडली दोषों का निवारण: कुंडली में मौजूद दोषों का निवारण होता है।
  18. अशुभ ग्रहों का प्रभाव कम होता है: कुंडली में अशुभ ग्रहों के प्रभाव को कम करता है।
  19. सकारात्मक ऊर्जा का विकास: जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और वातावरण का विकास होता है।
  20. व्यापार में वृद्धि: व्यापार और व्यवसाय में उन्नति होती है।
  21. शारीरिक बल: शारीरिक शक्ति और सहनशक्ति में वृद्धि होती है।
  22. अवसाद से मुक्ति: मानसिक तनाव और अवसाद से मुक्ति मिलती है।
  23. समाज में प्रतिष्ठा: समाज में सम्मान और प्रतिष्ठा बढ़ती है।
  24. दुष्ट प्रवृत्तियों का नाश: नकारात्मक और दुष्ट प्रवृत्तियों का नाश होता है।
  25. संतान प्राप्ति: संतान सुख की प्राप्ति होती है।
  26. भय का निवारण: अनावश्यक भय और चिंता का नाश होता है।
  27. सपनों की प्राप्ति: जीवन में लक्ष्यों और सपनों की प्राप्ति होती है।
  28. योग और ध्यान में प्रगति: योग और ध्यान के अभ्यास में प्रगति होती है।
  29. अनुकूल विवाह योग: विवाह में आने वाली बाधाओं का निवारण होता है।
  30. सम्पूर्ण सुरक्षा: जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सम्पूर्ण सुरक्षा की प्राप्ति होती है।

बगलामुखी बीज मंत्र के जाप के लिए उपयुक्त मुहुर्थ

बगलामुखी बीज मंत्र का जाप किसी भी समय किया जा सकता है, लेकिन कुछ विशेष दिवस और समय अधिक फलदायी माने जाते हैं:

  1. अष्टमी और नवमी तिथि: देवी की पूजा के लिए ये दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
  2. पूर्णिमा और अमावस्या: ये दिन तांत्रिक साधनाओं और मंत्र जाप के लिए अत्यंत शुभ माने जाते हैं।
  3. गुरुवार: गुरु वार को देवी बगलामुखी की पूजा और मंत्र जाप करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है।
  4. विशेष त्योहार और नवरात्रि: नवरात्रि और अन्य विशेष त्योहारों के दौरान इस मंत्र का जाप करना अत्यंत लाभकारी होता है।
  5. प्रत्येक सुबह और संध्या: प्रातःकाल और संध्या का समय मंत्र जाप के लिए उपयुक्त होता है, जब वातावरण शुद्ध और शांत होता है।
  6. किसी भी देवी की पूजा के लिये मंगलवार शुभ मुहुर्थ होता है।

बगलामुखी बीज मंत्र का जाप विधि

  1. शुद्धता: मंत्र जाप से पहले शारीरिक और मानसिक शुद्धता आवश्यक है।
  2. साफ और शुद्ध स्थान: मंत्र जाप के लिए एक साफ और शुद्ध स्थान का चयन करें।
  3. पीले वस्त्र: देवी बगलामुखी की पूजा में पीले वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है।
  4. ध्यान और एकाग्रता: मंत्र जाप के दौरान ध्यान और एकाग्रता बनाए रखें।
  5. माला का प्रयोग: मंत्र जाप के लिए रुद्राक्ष या स्फटिक माला का प्रयोग करें।
  6. संख्या: बगलामुखी बीज मंत्र का जाप कम से कम 108 बार करें।

अंत में

बगलामुखी बीज मंत्र एक अत्यंत शक्तिशाली और प्रभावी मंत्र है। इसका सही ढंग से और नियमित जाप करने से व्यक्ति को अनेक लाभ प्राप्त होते हैं। यह मंत्र दुश्मनों से रक्षा, मन की शांति, आर्थिक समृद्धि, स्वास्थ्य, और अन्य कई लाभ प्रदान करता है। उपयुक्त दिवस और समय पर इस मंत्र का जाप करने से इसके प्रभाव और भी अधिक बढ़ जाते हैं। बगलामुखी बीज मंत्र का जाप व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने में सहायक होता है और उसे एक संतुलित, समृद्ध, और सुरक्षित जीवन प्रदान करता है।

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बगलामुखी अष्टोत्तर शतनाम स्त्रोत

माता बगलामुखी अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र एक अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली स्तोत्र है, जिसमें माता बगलामुखी के 108 नामों का संकीर्तन किया जाता है। यह स्तोत्र साधक को माता की कृपा प्राप्त करने और जीवन की सभी बाधाओं और नकारात्मकता से मुक्ति दिलाने में सहायक होता है। मंगलवार से ४१ दिन तक लगातार इसका पाठ किया जाता है।

ओम् ब्रह्मास्त्र-रुपिणी देवी, माता श्रीबगलामुखी।
चिच्छिक्तिर्ज्ञान-रुपा च, ब्रह्मानन्द-प्रदायिनी॥
महा-विद्या महा-लक्ष्मी श्रीमत् -त्रिपुर-सुन्दरी।
भुवनेशी जगन्माता, पार्वती सर्व-मंगला॥
ललिता भैरवी शान्ता, अन्नपूर्णा कुलेश्वरी।
वाराही छिन्नमस्ता च, तारा काली सरस्वती॥
जगत् -पूज्या महा-माया, कामेशी भग-मालिनी।
दक्ष-पुत्री शिवांकस्था, शिवरुपा शिवप्रिया॥
सर्व-सम्पत्-करी देवी, सर्व-लोक वशंकरी।
वेद-विद्या महा-पूज्या, भक्ताद्वेषी भयंकरी॥
स्तम्भ-रुपा स्तम्भिनी च, दुष्ट-स्तम्भन-कारिणी।
भक्त-प्रिया महा-भोगा, श्रीविद्या ललिताम्बिका॥
मेना-पुत्री शिवानन्दा, मातंगी भुवनेश्वरी।
नारसिंही नरेन्द्रा च, नृपाराध्या नरोत्तमा॥
नागिनी नाग-पुत्री च, नगराज-सुता उमा।
पीताम्बरा पीत-पुष्पा च, पीत-वस्त्र-प्रिया शुभा॥
पीत-गन्ध-प्रिया रामा, पीत-रत्नार्चिता शिवा।
अर्द्ध-चन्द्र-धरी देवी, गदा-मुद्-गर-धारिणी॥
सावित्री त्रि-पदा शुद्धा, सद्यो राग-विवर्द्धिनी।
विष्णु-रुपा जगन्मोहा, ब्रह्म-रुपा हरि-प्रिया॥
रुद्र-रुपा रुद्र-शक्तिद्दिन्मयी भक्त-वत्सला।
लोक-माता शिवा सन्ध्या, शिव-पूजन-तत्परा॥
धनाध्यक्षा धनेशी च, धर्मदा धनदा धना।
चण्ड-दर्प-हरी देवी, शुम्भासुर-निवर्हिणी॥
राज-राजेश्वरी देवी, महिषासुर-मर्दिनी।
मधु-कैटभ-हन्त्री च, रक्त-बीज-विनाशिनी॥
धूम्राक्ष-दैत्य-हन्त्री च, भण्डासुर-विनाशिनी।
रेणु-पुत्री महा-माया, भ्रामरी भ्रमराम्बिका॥
ज्वालामुखी भद्रकाली, बगला शत्र-ुनाशिनी।
इन्द्राणी इन्द्र-पूज्या च, गुह-माता गुणेश्वरी॥
वज्र-पाश-धरा देवी, जिह्वा-मुद्-गर-धारिणी।
भक्तानन्दकरी देवी, बगला परमेश्वरी॥


॥ फल श्रुति ॥


अष्टोत्तरशतं नाम्नां, बगलायास्तु यः पठेत्।
रिप-ुबाधा-विनिर्मुक्तः, लक्ष्मीस्थैर्यमवाप्नुयात्॥
भूत-प्रेत-पिशाचाश्च, ग्रह-पीड़ा-निवारणम्।
राजानो वशमायाति, सर्वैश्वर्यं च विन्दति॥
नाना-विद्यां च लभते, राज्यं प्राप्नोति निश्चितम्।
भुक्ति-मुक्तिमवाप्नोति, साक्षात् शिव-समो भवेत्॥
॥ श्रीरूद्रयामले सर्व-सिद्धि-प्रद श्री बगलाष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम् ॥

बगलामुखी अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र के लाभ

  1. शत्रु नाश: बगलामुखी अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र का नियमित पाठ करने से शत्रुओं का नाश होता है और साधक की रक्षा होती है।
  2. नकारात्मकता का नाश: इस स्तोत्र का पाठ करने से जीवन में उपस्थित सभी प्रकार की नकारात्मक शक्तियों और बाधाओं का नाश होता है।
  3. कानूनी मामलों में विजय: इस स्तोत्र का पाठ कानूनी मामलों में विजय प्राप्त करने में सहायक होता है।
  4. मन की शांति: माता बगलामुखी के 108 नामों का संकीर्तन करने से साधक के मन को शांति और स्थिरता मिलती है।
  5. सुरक्षा की प्राप्ति: साधक को सभी प्रकार के भय और अनिष्ट से सुरक्षा प्राप्त होती है।
  6. आत्मबल में वृद्धि: इस स्तोत्र का नियमित पाठ साधक के आत्मबल और साहस में वृद्धि करता है।
  7. वाणी पर नियंत्रण: बगलामुखी अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र का पाठ वाणी पर नियंत्रण और प्रभावशाली संप्रेषण की क्षमता प्रदान करता है।
  8. धन और समृद्धि: माता बगलामुखी की कृपा से साधक को धन और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
  9. रोगों से मुक्ति: इस स्तोत्र का पाठ साधक को शारीरिक और मानसिक रोगों से मुक्ति दिलाता है।
  10. आध्यात्मिक उन्नति: बगलामुखी अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र का नियमित पाठ साधक की आध्यात्मिक उन्नति में सहायक होता है।
  11. परिवारिक कलह का नाश: इस स्तोत्र का पाठ परिवारिक कलह और विवादों का नाश करता है और परिवार में शांति और सौहार्द की स्थापना करता है।
  12. सफलता और सिद्धि: बगलामुखी अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र का पाठ साधक को हर कार्य में सफलता और सिद्धि प्राप्त करने में सहायक होता है।

अंत मे

माता बगलामुखी अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र का नियमित और श्रद्धापूर्वक पाठ साधक के जीवन में शांति, सुरक्षा, और समृद्धि लाता है। माता बगलामुखी की कृपा से साधक को सभी प्रकार की बाधाओं और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती है और जीवन में हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है।

Bagalamukhi kavach strot for family peace

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बगलामुखी कवच स्तोत्र

माता बगलामुखी कवच स्तोत्र एक अत्यंत शक्तिशाली और पवित्र स्तोत्र है जिसे पढ़ने से साधक की रक्षा और परिवार शांती होती है और जीवन में शांति और समृद्धि प्राप्त होती है। इस स्तोत्र का पाठ विशेष रूप से शत्रुओं के नाश और नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा के लिए किया जाता है।

बगलामुखी कवच स्तोत्र का पाठ और विधि

आवश्यक सामग्री:

  1. बगलामुखी यंत्र या मूर्ति
  2. पीला वस्त्र
  3. पीले फूल (जैसे गेंदे के फूल)
  4. हल्दी की माला
  5. चंदन का पेस्ट
  6. धूप, दीपक
  7. पवित्र जल (गंगा जल)
  8. नैवेद्य (मिठाई, फल)

पाठ विधि

  1. स्नान और स्वच्छ वस्त्र: सर्वप्रथम स्नान करें और स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करें।
  2. पूजा स्थल: पूजा स्थल को साफ करें और वहां पीला वस्त्र बिछाएं।
  3. मूर्ति या यंत्र की स्थापना: बगलामुखी यंत्र या मूर्ति को पूजा स्थल पर स्थापित करें।
  4. ध्यान: माता बगलामुखी का ध्यान करें और उनसे स्तोत्र पाठ के लिए आशीर्वाद माँगें।

बगलामुखी कवच स्तोत्र

ॐ नमो बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिव्हां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा।

ध्यानम
पीताम्बरां पीतवर्णां पीतगन्धानुलेपनाम्।
पीतपुष्पैः सुपूजितां ध्यायेत् बगलामुखीं शुभाम्॥

स्तोत्रम्
ब्रह्मास्त्ररूपा विधि पालनाय सर्वदुष्ट शान्तिकराय नमः।
सर्वत्र जयमंगलकारिण्यै बगलामुख्यै नमो नमः॥

कवचम्
शिरो मे बगलादेवी कण्ठं मे बगलावति।
स्तम्भयेत सर्वदुष्टानां यत्र तत्र बगलावति॥

विनियोग:
ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिव्हां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा॥

रक्षा मन्त्र:
ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिव्हां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा॥

ध्यान मन्त्र:
पीतवर्णां चतुर्भुजां त्रिनेत्रां पीताम्बर धरां देवीं।
पाशांकुशधरां चैव वज्रं मुद्गरं च वरदां ध्यायेत्॥

स्तोत्र समाप्ति:
ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिव्हां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा॥

पाठ के बाद

  1. आरती: माता बगलामुखी की आरती करें।
  2. नैवेद्य: माता को नैवेद्य अर्पित करें (मिठाई, फल आदि) और प्रसाद के रूप में ग्रहण करें।
  3. प्रसाद वितरण: सभी भक्तों के बीच प्रसाद का वितरण करें।
  4. आशीर्वाद: माता का आशीर्वाद प्राप्त करें और पूजा स्थल को स्वच्छ करें।

अंत मे

माता बगलामुखी कवच स्तोत्र का नियमित पाठ साधक को सभी प्रकार की नकारात्मकता, बाधाओं और शत्रुओं से सुरक्षा प्रदान करता है। यह स्तोत्र साधक के जीवन में शांति, समृद्धि और सुरक्षा की स्थापना करता है। माता बगलामुखी की कृपा से साधक का जीवन सुरक्षित और सफल बनता है।

Bagalamukhi dhyan sadhana for protection

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बगलामुखी ध्यान साधना

माता बगलामुखी की ध्यान साधना एक अत्यंत शक्तिशाली और प्रभावशाली साधना है, जो साधक को आंतरिक शांति, सुरक्षा, और जीवन में सफलता प्रदान करती है। इस साधना का मुख्य उद्देश्य मन को एकाग्र करना, नकारात्मक शक्तियों का नाश करना और माता बगलामुखी की कृपा प्राप्त करना है।

ध्यान साधना विधि

आवश्यक सामग्री:

  1. बगलामुखी यंत्र या मूर्ति
  2. पीला वस्त्र
  3. पीले फूल (जैसे गेंदे के फूल)
  4. हल्दी की माला
  5. चंदन का पेस्ट
  6. धूप, दीपक
  7. पवित्र जल (गंगा जल)
  8. नैवेद्य (मिठाई, फल)

साधना की तैयारी

  1. स्नान और स्वच्छ वस्त्र: सर्वप्रथम स्नान करें और स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करें।
  2. पूजा स्थल: पूजा स्थल को साफ करें और वहां पीला वस्त्र बिछाएं।
  3. मूर्ति या यंत्र की स्थापना: बगलामुखी यंत्र या मूर्ति को पूजा स्थल पर स्थापित करें।

ध्यान साधना प्रक्रिया

  1. आसन: पीले वस्त्र पर पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें।
  2. आवाहन: माता बगलामुखी का ध्यान करें और उनसे साधना के लिए आशीर्वाद माँगें।
    • “ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिव्हां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा”
  3. प्राणायाम: साधना शुरू करने से पहले कुछ मिनट तक गहरी सांस लें और छोड़ें। यह मन को शांत करने और ध्यान के लिए तैयार करने में सहायक होता है।
  4. ध्यान: माता बगलामुखी की मूर्ति या यंत्र को अपने मन में स्थिर करें। अपनी आँखें बंद करें और माता के दिव्य स्वरूप का ध्यान करें।
  5. मंत्र जप: “ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिव्हां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा” मंत्र का जप करें। मंत्र का जप कम से कम 108 बार करें।
  6. माला जप: हल्दी की माला का उपयोग करके मंत्र का जप करें। प्रत्येक मनके पर मंत्र का जप करें।
  7. दृष्टि एकाग्रता: अपनी दृष्टि को माता की मूर्ति या यंत्र पर केंद्रित करें और मन को स्थिर रखें। माता के दिव्य स्वरूप का ध्यान करें और अपनी सभी समस्याओं को माता के चरणों में समर्पित करें।
  8. आरती: ध्यान के बाद माता बगलामुखी की आरती करें।
  9. नैवेद्य: माता को नैवेद्य अर्पित करें (मिठाई, फल आदि) और प्रसाद के रूप में ग्रहण करें।

साधना के बाद

  1. ध्यान समाप्ति: माता बगलामुखी से अपनी मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करें।
  2. प्रसाद वितरण: सभी भक्तों के बीच प्रसाद का वितरण करें।
  3. आशीर्वाद: माता का आशीर्वाद प्राप्त करें और पूजा स्थल को स्वच्छ करें।

अंत मे

बगलामुखी ध्यान साधना का सही और श्रद्धा पूर्वक पालन करने से साधक के जीवन में सभी प्रकार की नकारात्मकता, बाधाओं और शत्रुओं का नाश होता है। माता बगलामुखी की कृपा से साधक को शांति, समृद्धि, सुरक्षा और आत्मबल प्राप्त होता है। इस साधना को नियमित रूप से करने से साधक की आध्यात्मिक उन्नति होती है और जीवन में सफलता प्राप्त होती है।

Bagalamukhi abhishek for family peace

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बगलामुखी अभिषेक

माता बगलामुखी का अभिषेक करना एक पवित्र और विशेष अनुष्ठान माना जाता है जिसमें माता बगलामुखी की मूर्ति या यंत्र को पवित्र जल और अन्य द्रव्यों से स्नान कराया जाता है। यह अभिषेक साधक की समर्पण और भक्ति को दर्शाता है और माता की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत प्रभावी माना जाता है।

अभिषेक विधि

आवश्यक सामग्री:

  1. बगलामुखी यंत्र या मूर्ति
  2. पवित्र जल (गंगा जल)
  3. दूध
  4. दही
  5. घी
  6. शहद
  7. शक्कर
  8. चंदन का पेस्ट
  9. हल्दी पाउडर
  10. कुंकुम
  11. फूल (विशेषकर पीले फूल)
  12. पान के पत्ते
  13. पीला वस्त्र
  14. धूप, दीपक

अभिषेक की तैयारी:

  1. स्नान और स्वच्छ वस्त्र: सर्वप्रथम स्नान करें और स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करें।
  2. पूजा स्थल: पूजा स्थल को साफ करें और वहां पीला वस्त्र बिछाएं।
  3. मूर्ति या यंत्र की स्थापना: बगलामुखी यंत्र या मूर्ति को पूजा स्थल पर स्थापित करें।

अभिषेक प्रक्रिया:

  1. आवाहन: माता बगलामुखी का ध्यान करें और उनसे पूजा के लिए आशीर्वाद माँगें।
    • “ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिव्हां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा”
  2. पवित्र जल से स्नान: सर्वप्रथम गंगा जल से माता बगलामुखी की मूर्ति या यंत्र को स्नान कराएं।
  3. दूध से अभिषेक: माता को दूध से स्नान कराएं और “ॐ ह्लीं बगलामुखि नमः” मंत्र का जप करें।
  4. दही से अभिषेक: दही से माता का अभिषेक करें और “ॐ ह्लीं बगलामुखि नमः” मंत्र का जप करें।
  5. घी से अभिषेक: घी से माता का अभिषेक करें और “ॐ ह्लीं बगलामुखि नमः” मंत्र का जप करें।
  6. शहद से अभिषेक: शहद से माता का अभिषेक करें और “ॐ ह्लीं बगलामुखि नमः” मंत्र का जप करें।
  7. शक्कर से अभिषेक: शक्कर से माता का अभिषेक करें और “ॐ ह्लीं बगलामुखि नमः” मंत्र का जप करें।
  8. चंदन और हल्दी का पेस्ट: चंदन और हल्दी के पेस्ट से माता को अभिषेक करें और “ॐ ह्लीं बगलामुखि नमः” मंत्र का जप करें।
  9. पवित्र जल से अंतिम स्नान: पुनः गंगा जल से माता की मूर्ति या यंत्र को स्नान कराएं।

पूजन और अर्चना

  1. माता का श्रृंगार: माता को चंदन, कुंकुम और फूल अर्पित करें।
  2. धूप और दीपक: धूप और दीप जलाकर माता को अर्पित करें।
  3. पुष्प अर्पण: माता को पान के पत्ते और पीले फूल अर्पित करें।
  4. नैवेद्य: माता को नैवेद्य अर्पित करें (मिठाई, फल आदि)।
  5. मंत्र जप: माता बगलामुखी के बीज मंत्र या “ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिव्हां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा” मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें।
  6. आरती: माता बगलामुखी की आरती करें।

निष्कर्ष व लाभ

माता बगलामुखी के अभिषेक और साधना से साधकों को कई महत्वपूर्ण लाभ प्राप्त होते हैं जैसे कि..

  1. शत्रुनाश: माता बगलामुखी की कृपा से शत्रुओं का नाश होता है और साधक के जीवन में शांति बनी रहती है।
  2. नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति: बगलामुखी अभिषेक से सभी प्रकार की नकारात्मक शक्तियों और बुरी नजर का नाश होता है।
  3. मानसिक शांति: माता की पूजा से मानसिक शांति प्राप्त होती है और तनाव, चिंता, और अवसाद से मुक्ति मिलती है।
  4. सुरक्षा: माता बगलामुखी की साधना से साधक को हर प्रकार की सुरक्षा प्राप्त होती है, चाहे वह भौतिक हो या आध्यात्मिक।
  5. वाणी की शक्ति: बगलामुखी अर्चना से वाणी की शक्ति और प्रभाव बढ़ता है, जिससे व्यक्ति की बातों में आकर्षण और प्रभावशीलता आती है।
  6. विवादों का निवारण: माता की कृपा से सभी प्रकार के विवाद और कानूनी समस्याओं का निवारण होता है और साधक को न्याय प्राप्त होता है।
  7. आर्थिक समृद्धि: माता बगलामुखी की पूजा से आर्थिक समस्याओं का समाधान होता है और साधक को धन और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
  8. व्यवसाय में सफलता: व्यवसाय में आने वाली सभी बाधाओं का नाश होता है और व्यापार में सफलता और वृद्धि प्राप्त होती है।
  9. स्वास्थ्य लाभ: माता की कृपा से साधक को स्वास्थ्य लाभ मिलता है और रोगों से मुक्ति मिलती है, जिससे जीवन स्वस्थ और आनंदमय बनता है।
  10. आध्यात्मिक उन्नति: माता बगलामुखी की आराधना से साधक की आध्यात्मिक उन्नति होती है, ध्यान और साधना में प्रगति होती है, और साधक को आध्यात्मिक ज्ञान और अनुभव प्राप्त होते हैं।

इन लाभों को प्राप्त करने के लिए माता बगलामुखी की अर्चना, साधना और अभिषेक का नियमित पालन करना चाहिए। माता बगलामुखी की कृपा से साधक के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि, और सुरक्षा बनी रहती है।

माता बगलामुखी का अभिषेक एक पवित्र और विशेष अनुष्ठान है जो साधक को माता की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने में सहायक होता है। इस विधि का सही और श्रद्धा पूर्वक पालन करने से साधक के जीवन में सभी प्रकार की नकारात्मकता, बाधाओं और शत्रुओं का नाश होता है और शांति, समृद्धि, और सुरक्षा की प्राप्ति होती है।

Bagalamukhi archana for peace & protection

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बगलामुखी अर्चना

माता बगलामुखी अर्चना एक विशेष पूजा विधि है जो साधक को माता बगलामुखी की कृपा प्राप्त करने में सहायक होती है। बगलामुखी अर्चना का मुख्य उद्देश्य साधक के जीवन से नकारात्मकता, शत्रुओं का नाश और शांति की स्थापना करना होता है।

अर्चना विधि

  1. पूजन सामग्री:
    • बगलामुखी यंत्र या मूर्ति
    • पीला वस्त्र
    • पीले फूल (जैसे गेंदे के फूल)
    • हल्दी की माला
    • अक्षत (चावल)
    • चंदन
    • धूप, दीपक
    • पीला आसन
    • नैवेद्य (मिठाई, फल)
  2. पूजा की तैयारी:
    • सर्वप्रथम स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
    • पूजा स्थल को स्वच्छ करके वहां पीला वस्त्र बिछाएं।
    • बगलामुखी यंत्र या मूर्ति को पूजा स्थल पर स्थापित करें।
    • पीला आसन बिछाकर उस पर बैठें।
  3. अर्चना प्रक्रिया:
    1. ध्यान: माता बगलामुखी का ध्यान करें और उनसे पूजा के लिए आशीर्वाद माँगें।
    2. आवाहन: माता बगलामुखी का आवाहन करें:
      • “ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिव्हां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा”
    3. अभिषेक: माता की मूर्ति या यंत्र को गंगा जल, दूध, दही, शहद और शुद्ध जल से स्नान कराएं।
    4. स्नान: पुनः गंगा जल से मूर्ति या यंत्र को स्नान कराएं और स्वच्छ कपड़े से पोंछें।
    5. अलंकृत: माता को चंदन, हल्दी, कुमकुम, और पीले फूल अर्पित करें।
    6. धूप और दीप: धूप और दीप जलाकर माता को अर्पित करें।
    7. अक्षत और फूल: माता को अक्षत और पीले फूल अर्पित करें।
    8. माला: हल्दी की माला अर्पित करें और मंत्र जप करें:
      • “ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिव्हां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा” मंत्र का 108 बार जप करें।
    9. नैवेद्य: माता को नैवेद्य अर्पित करें (मिठाई, फल आदि)।
    10. आरती: माता बगलामुखी की आरती करें।
  4. समापन:
    • माता बगलामुखी से अपनी मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करें।
    • सभी भक्तों के बीच प्रसाद का वितरण करें।
    • माता का आशीर्वाद प्राप्त करें और पूजा स्थल को स्वच्छ करें।

लाभ

माता बगलामुखी की अर्चना और साधना करने से साधकों को अनेक लाभ प्राप्त होते हैं जैसे कि:

  1. शत्रुनाश: माता बगलामुखी की कृपा से शत्रुओं का नाश होता है और जीवन में शांति का अनुभव होता है।
  2. नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति: बगलामुखी अर्चना से सभी प्रकार की नकारात्मक शक्तियों और बाधाओं का नाश होता है।
  3. मानसिक शांति: माता की पूजा से मानसिक शांति प्राप्त होती है और तनाव, चिंता दूर होते हैं।
  4. सुरक्षा: माता बगलामुखी की साधना से साधक को सुरक्षा प्राप्त होती है और जीवन में डर और भय का नाश होता है।
  5. वाणी की शक्ति: बगलामुखी अर्चना से वाणी की शक्ति और प्रभाव बढ़ता है, जिससे व्यक्ति की बातों में आकर्षण और प्रभावशीलता आती है।
  6. विवादों का निवारण: माता की कृपा से सभी प्रकार के विवाद और कानूनी समस्याओं का निवारण होता है।
  7. आर्थिक समृद्धि: माता बगलामुखी की पूजा से आर्थिक समस्याओं का समाधान होता है और धन की प्राप्ति होती है।
  8. व्यवसाय में सफलता: व्यवसाय में आने वाली सभी बाधाओं का नाश होता है और व्यापार में सफलता प्राप्त होती है।
  9. स्वास्थ्य लाभ: माता की कृपा से साधक को स्वास्थ्य लाभ मिलता है और रोगों से मुक्ति मिलती है।
  10. पारिवारिक सुख: बगलामुखी अर्चना से परिवार में सुख-शांति और सौहार्द का वातावरण बनता है।
  11. भय का नाश: माता बगलामुखी की साधना से सभी प्रकार के भय और आशंकाओं का नाश होता है।
  12. आध्यात्मिक उन्नति: माता की आराधना से साधक की आध्यात्मिक उन्नति होती है और ध्यान तथा साधना में प्रगति होती है।

इन लाभों को प्राप्त करने के लिए माता बगलामुखी की अर्चना, साधना और मंत्र जाप का नियमित पालन करना चाहिए। माता बगलामुखी की कृपा से साधक के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि, और सुरक्षा बनी रहती है।

बगलामुखी अर्चना विधि का सही और श्रद्धा पूर्वक पालन करने से साधक के जीवन में सभी प्रकार की नकारात्मकता, बाधाओं और शत्रुओं का नाश होता है। माता बगलामुखी की कृपा से साधक को शांति, समृद्धि और सुरक्षा प्राप्त होती है।

Bagalamukhi havan for all obstacles

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बगलामुखी हवन

महाविद्बया बगलामुखी का हवन एक अत्यंत शक्तिशाली और प्रभावी अनुष्ठान माना जाता है, जो शत्रुओं के नाश, कानूनी मामलों में विजय, और जीवन की विभिन्न बाधाओं को दूर करने के लिए किया जाता है। यह हवन विशेष रूप से कठिन परिस्थितियों में शक्ति, सफलता व विजय प्राप्त करने के लिए किया जाता है।

बगलामुखी हवन की विधि:

  1. हवन की तैयारी:
    • हवन करने के लिए एक पवित्र और स्वच्छ स्थान चुनें।
    • हवन कुंड को गोमूत्र और गंगाजल से पवित्र करें।
    • पीला वस्त्र धारण करें और पीले आसन पर बैठें।
  2. आवश्यक सामग्री:
    • हवन कुंड
    • आम की लकड़ी, गोबर के उपले
    • हवन सामग्री (तिल, जौ, चावल, गुड़, घी)
    • पीले फूल, हल्दी, कुमकुम
    • बगलामुखी माता की मूर्ति या चित्र
    • हल्दी और बेसन के लड्डू का भोग
  3. मंत्र जप और संकल्प:
    • हवन शुरू करने से पहले, बगलामुखी माता का ध्यान करें और संकल्प लें।
    • “ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिव्हां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा” मंत्र का जप करते हुए हवन की सामग्री कुंड में डालें।
  4. आहुति:
    • हवन कुंड में आम की लकड़ी और गोबर के उपले जलाएं।
    • हर आहुति के साथ उपरोक्त मंत्र का उच्चारण करें और सामग्री कुंड में अर्पित करें।
    • 108 बार आहुति दें। प्रत्येक आहुति के साथ “स्वाहा” शब्द का उच्चारण करें।
  5. अभिषेक:
    • हवन के बाद बगलामुखी माता की मूर्ति या चित्र पर हल्दी और कुमकुम से अभिषेक करें।
    • पीले फूल चढ़ाएं और हल्दी का तिलक लगाएं।
  6. भोग और आरती:
    • बगलामुखी माता को हल्दी और बेसन के लड्डू का भोग लगाएं।
    • माता की आरती करें और उपस्थित सभी लोगों को आरती दिखाएं।
  7. प्रसाद वितरण:
    • हवन समाप्ति के बाद प्रसाद वितरित करें और सभी को आशीर्वाद दें।

बगलामुखी हवन के लाभ:

  1. शत्रुनाश: शत्रुओं का नाश होता है और वे निष्क्रिय हो जाते हैं।
  2. कानूनी विजय: न्यायालय के मामलों में विजय प्राप्त होती है।
  3. आर्थिक समृद्धि: आर्थिक समस्याओं का समाधान होता है और धन-धान्य की वृद्धि होती है।
  4. वाणी में शक्ति: वाणी में शक्ति और प्रभाव बढ़ता है।
  5. सुरक्षा: नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा मिलती है।
  6. बाधा निवारण: जीवन की सभी बाधाओं और कठिनाइयों का निवारण होता है।
  7. मानसिक शांति: मानसिक तनाव कम होता है और शांति मिलती है।
  8. स्वास्थ्य लाभ: शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।
  9. पारिवारिक सुख: परिवार में सुख, शांति, और समृद्धि आती है।
  10. सफलता: कार्यक्षेत्र में सफलता मिलती है।
  11. भयमुक्ति: अनजाने भय और आशंकाओं से मुक्ति मिलती है।
  12. आध्यात्मिक उन्नति: साधक की आध्यात्मिक उन्नति होती है।

बगलामुखी हवन का नियमित रूप से करने से व्यक्ति को जीवन में हर प्रकार की बाधाओं से मुक्ति मिलती है और वह सफलता की ओर अग्रसर होता है।

Bagalamukhi strot for strong protection

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बगलामुखी स्तोत्र

बगलामुखी देवी का स्तोत्र शक्तिशाली और अद्भुत होता है। इस स्तोत्र के पाठ से शत्रुओं का नाश, रोगों का निदान और हर प्रकार की बाधाओं से मुक्ति प्राप्त होती है। यह पाठ मंगलवार से शुरु करके लगातार ४१ दिन करना चाहिये।

मार्गाम्भोजं रत्नसारैः सितमणिमणिबिंबैरभिनवं।
जगन्नेत्रं जातं त्रिभुवनभवं योगजनकम्॥

कलाकारं ज्योतिः करकमलसंपर्कसुभगं।
सुखैश्वैर्यैर्देयं गणितमरुणाद्यैः प्रणमताम्॥

महास्तंभं रंभापरिसदनमाक्रामति यथा।
अतिक्रान्तं यान्तं त्रिदशवरनारीजननुतम्॥

मयूरं चक्रं च ध्वजमथ बाणं च दधतं।
ध्वनिं रक्षं चैकं प्रणमति नमस्तेऽस्तु भगवन्॥

शिवं शक्तिं शंभोः परिशतसखायं गणपतेः।
कुमारं विघ्नेशं प्रभवति भवेत्त्वं च जगताम्॥

प्रभावं ते लोकं प्रणमति सविध्वंसितभयं।
भवाब्धौ मग्नानां तव चरणसंपर्कसुभगम्॥

विभोः स्थानं स्थातुं तव चरणदास्यं विजयते।
जनो यस्तं वंद्यः स भवति नमस्तेऽस्तु भगवन्॥

तवेदं सूक्तं या पठति रजनौ या च दिवसे।
विशेषेण स्तोत्रं भवति भवरोगस्य विजयम्॥

विमुक्तस्तं यांतं विमलमनसं चारुचरणं।
सदा भक्त्या युक्तं व्रजति स सदा गोपवदनः॥

॥ इति श्री बगलामुखी स्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

बगलामुखी स्तोत्र पाठ के लाभ

  1. शत्रुनाश: शत्रुओं का नाश होता है और वे निष्क्रिय हो जाते हैं।
  2. मानसिक शांति: मानसिक तनाव कम होता है और शांति मिलती है।
  3. सुरक्षा: नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा मिलती है।
  4. सफलता: कार्यक्षेत्र में सफलता मिलती है।
  5. स्वास्थ्य: शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।
  6. बाधा निवारण: जीवन की सभी बाधाओं और कठिनाइयों का निवारण होता है।
  7. धन-धान्य की वृद्धि: आर्थिक समस्याओं का समाधान होता है और धन-धान्य की वृद्धि होती है।
  8. वाणी में प्रभाव: वाणी में शक्ति और प्रभाव बढ़ता है।
  9. आध्यात्मिक उन्नति: साधक की आध्यात्मिक उन्नति होती है।
  10. भयमुक्ति: अनजाने भय और आशंकाओं से मुक्ति मिलती है।
  11. परिवारिक सुख: परिवार में सुख, शांति, और समृद्धि आती है।
  12. कानूनी विजय: न्यायालय के मामलों में विजय प्राप्त होती है।

बगलामुखी स्तोत्र का नियमित पाठ श्रद्धा और विश्वास के साथ करने से साधक को अनेक लाभ प्राप्त होते हैं और जीवन में हर प्रकार की सफलता प्राप्त होती है।

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बगला खड्ग माला पूजा

बगला खड्ग माला पूजा तांत्रिक विधियों में से एक महत्वपूर्ण साधना है, जिसका मुख्य उद्देश्य व्यक्ति को शत्रुओं से सुरक्षा प्रदान करना और जीवन में सभी प्रकार की बाधाओं को दूर करना होता है। यह पूजा विशेषकर तब की जाती है जब व्यक्ति को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा हो या उसे शत्रुओं से बड़ा खतरा हो।

बगला खड्ग माला पूजा की विधि:

  1. पूजा की तैयारी:
    • सबसे पहले, स्नान करके स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करें।
    • एक साफ स्थान पर पीला आसन बिछाएं और उस पर बैठें।
    • पूजा के स्थान को गोमूत्र और गंगाजल से पवित्र करें।
  2. ध्यान और संकल्प:
    • अपनी आँखें बंद करके बगलामुखी माता का ध्यान करें।
    • संकल्प लें कि आप शत्रुओं के नाश और सभी प्रकार की बाधाओं को दूर करने के लिए यह पूजा कर रहे हैं।
  3. मंत्र जप:
    • बगला खड्ग माला का जप करें। यह माला विशेष प्रकार की होती है और इसे पूजा के समय धारण किया जाता है।
    • “ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिव्हां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा” मंत्र का 108 बार जप करें।
  4. हवन:
    • हवन कुंड में घी, तिल, और जौ की आहुति दें।
    • हर आहुति के साथ उपरोक्त मंत्र का उच्चारण करें।
  5. अभिषेक:
    • बगलामुखी माता की मूर्ति या चित्र पर हल्दी और कुमकुम से अभिषेक करें।
    • पीले फूल, हल्दी, और चंदन का प्रयोग करें।
  6. भोग:
    • माता को बेसन के लड्डू, हल्दी के लड्डू, और पीले मिठाई का भोग लगाएं।
  7. आरती:
    • बगलामुखी माता की आरती करें और परिवार के सभी सदस्यों के साथ मिलकर भजन-कीर्तन करें।
  8. प्रसाद वितरण:
    • पूजा समाप्ति के बाद प्रसाद वितरित करें और सभी को आशीर्वाद दें।

बगला खड्ग माला पूजा के लाभ:

  1. शत्रुनाश: शत्रुओं का नाश करती है और उन्हें निष्क्रिय करती है।
  2. कानूनी मामलों में विजय: न्यायालय के मामलों में विजय दिलाती है।
  3. आर्थिक समृद्धि: आर्थिक समस्याओं को दूर करके धन-धान्य की वृद्धि करती है।
  4. वाणी में शक्ति: वाणी में शक्ति और प्रभाव बढ़ाती है।
  5. सुरक्षा: नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा प्रदान करती है।
  6. बाधा निवारण: जीवन की सभी बाधाओं और कठिनाइयों को दूर करती है।
  7. मानसिक शांति: मानसिक तनाव को कम करके शांति और स्थिरता प्रदान करती है।
  8. स्वास्थ्य लाभ: शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को सुधारती है।
  9. पारिवारिक सुख: परिवार में सुख, शांति, और समृद्धि लाती है।
  10. सफलता: कार्यक्षेत्र में सफलता और उन्नति दिलाती है।
  11. भयमुक्ति: अनजाने भय और आशंकाओं से मुक्ति दिलाती है।
  12. आध्यात्मिक उन्नति: साधक की आध्यात्मिक उन्नति करती है और आत्मबल को बढ़ाती है।
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