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Bagalamukhi Ashtottara Shatnam Stotra for protection

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बगलामुखी अष्टोत्तर शतनाम स्त्रोत

माता बगलामुखी अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र एक अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली स्तोत्र है, जिसमें माता बगलामुखी के 108 नामों का संकीर्तन किया जाता है। यह स्तोत्र साधक को माता की कृपा प्राप्त करने और जीवन की सभी बाधाओं और नकारात्मकता से मुक्ति दिलाने में सहायक होता है। मंगलवार से ४१ दिन तक लगातार इसका पाठ किया जाता है।

ओम् ब्रह्मास्त्र-रुपिणी देवी, माता श्रीबगलामुखी।
चिच्छिक्तिर्ज्ञान-रुपा च, ब्रह्मानन्द-प्रदायिनी॥
महा-विद्या महा-लक्ष्मी श्रीमत् -त्रिपुर-सुन्दरी।
भुवनेशी जगन्माता, पार्वती सर्व-मंगला॥
ललिता भैरवी शान्ता, अन्नपूर्णा कुलेश्वरी।
वाराही छिन्नमस्ता च, तारा काली सरस्वती॥
जगत् -पूज्या महा-माया, कामेशी भग-मालिनी।
दक्ष-पुत्री शिवांकस्था, शिवरुपा शिवप्रिया॥
सर्व-सम्पत्-करी देवी, सर्व-लोक वशंकरी।
वेद-विद्या महा-पूज्या, भक्ताद्वेषी भयंकरी॥
स्तम्भ-रुपा स्तम्भिनी च, दुष्ट-स्तम्भन-कारिणी।
भक्त-प्रिया महा-भोगा, श्रीविद्या ललिताम्बिका॥
मेना-पुत्री शिवानन्दा, मातंगी भुवनेश्वरी।
नारसिंही नरेन्द्रा च, नृपाराध्या नरोत्तमा॥
नागिनी नाग-पुत्री च, नगराज-सुता उमा।
पीताम्बरा पीत-पुष्पा च, पीत-वस्त्र-प्रिया शुभा॥
पीत-गन्ध-प्रिया रामा, पीत-रत्नार्चिता शिवा।
अर्द्ध-चन्द्र-धरी देवी, गदा-मुद्-गर-धारिणी॥
सावित्री त्रि-पदा शुद्धा, सद्यो राग-विवर्द्धिनी।
विष्णु-रुपा जगन्मोहा, ब्रह्म-रुपा हरि-प्रिया॥
रुद्र-रुपा रुद्र-शक्तिद्दिन्मयी भक्त-वत्सला।
लोक-माता शिवा सन्ध्या, शिव-पूजन-तत्परा॥
धनाध्यक्षा धनेशी च, धर्मदा धनदा धना।
चण्ड-दर्प-हरी देवी, शुम्भासुर-निवर्हिणी॥
राज-राजेश्वरी देवी, महिषासुर-मर्दिनी।
मधु-कैटभ-हन्त्री च, रक्त-बीज-विनाशिनी॥
धूम्राक्ष-दैत्य-हन्त्री च, भण्डासुर-विनाशिनी।
रेणु-पुत्री महा-माया, भ्रामरी भ्रमराम्बिका॥
ज्वालामुखी भद्रकाली, बगला शत्र-ुनाशिनी।
इन्द्राणी इन्द्र-पूज्या च, गुह-माता गुणेश्वरी॥
वज्र-पाश-धरा देवी, जिह्वा-मुद्-गर-धारिणी।
भक्तानन्दकरी देवी, बगला परमेश्वरी॥


॥ फल श्रुति ॥


अष्टोत्तरशतं नाम्नां, बगलायास्तु यः पठेत्।
रिप-ुबाधा-विनिर्मुक्तः, लक्ष्मीस्थैर्यमवाप्नुयात्॥
भूत-प्रेत-पिशाचाश्च, ग्रह-पीड़ा-निवारणम्।
राजानो वशमायाति, सर्वैश्वर्यं च विन्दति॥
नाना-विद्यां च लभते, राज्यं प्राप्नोति निश्चितम्।
भुक्ति-मुक्तिमवाप्नोति, साक्षात् शिव-समो भवेत्॥
॥ श्रीरूद्रयामले सर्व-सिद्धि-प्रद श्री बगलाष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम् ॥

बगलामुखी अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र के लाभ

  1. शत्रु नाश: बगलामुखी अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र का नियमित पाठ करने से शत्रुओं का नाश होता है और साधक की रक्षा होती है।
  2. नकारात्मकता का नाश: इस स्तोत्र का पाठ करने से जीवन में उपस्थित सभी प्रकार की नकारात्मक शक्तियों और बाधाओं का नाश होता है।
  3. कानूनी मामलों में विजय: इस स्तोत्र का पाठ कानूनी मामलों में विजय प्राप्त करने में सहायक होता है।
  4. मन की शांति: माता बगलामुखी के 108 नामों का संकीर्तन करने से साधक के मन को शांति और स्थिरता मिलती है।
  5. सुरक्षा की प्राप्ति: साधक को सभी प्रकार के भय और अनिष्ट से सुरक्षा प्राप्त होती है।
  6. आत्मबल में वृद्धि: इस स्तोत्र का नियमित पाठ साधक के आत्मबल और साहस में वृद्धि करता है।
  7. वाणी पर नियंत्रण: बगलामुखी अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र का पाठ वाणी पर नियंत्रण और प्रभावशाली संप्रेषण की क्षमता प्रदान करता है।
  8. धन और समृद्धि: माता बगलामुखी की कृपा से साधक को धन और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
  9. रोगों से मुक्ति: इस स्तोत्र का पाठ साधक को शारीरिक और मानसिक रोगों से मुक्ति दिलाता है।
  10. आध्यात्मिक उन्नति: बगलामुखी अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र का नियमित पाठ साधक की आध्यात्मिक उन्नति में सहायक होता है।
  11. परिवारिक कलह का नाश: इस स्तोत्र का पाठ परिवारिक कलह और विवादों का नाश करता है और परिवार में शांति और सौहार्द की स्थापना करता है।
  12. सफलता और सिद्धि: बगलामुखी अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र का पाठ साधक को हर कार्य में सफलता और सिद्धि प्राप्त करने में सहायक होता है।

अंत मे

माता बगलामुखी अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र का नियमित और श्रद्धापूर्वक पाठ साधक के जीवन में शांति, सुरक्षा, और समृद्धि लाता है। माता बगलामुखी की कृपा से साधक को सभी प्रकार की बाधाओं और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती है और जीवन में हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है।

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